शुक्रवार, 29 जनवरी 2021

Hanuman Chalisa in Hindi- हनुमान चालीसा हिंदी में

 ।। श्री हनुमंताय  नमः।।

हनुमान चालीसा हिंदी में- Hanuman Chalisa in Hindi

Hanuman Chalisa in Hindi- हनुमान चालीसा हिंदी में- हनुमान चालीसा अवधी में लिखी एक काव्यात्मक रचना है जिसमें श्री राम के महान भक्त श्री हनुमान के गुणों एवं कार्यों का उल्लेख किया गया है जो अत्यन्त सूक्ष्म कृति है जिसमें श्री हनुमान जी की सुन्दर स्तुति की गई है। 
हनुमान चालीसा पूरे भारत में लोकप्रिय है किन्तु विशेष रूप से उत्तरी भारत में बहुत प्रसिद्ध है। लगभग सभी हिन्दुओं को यह कण्ठस्थ होती है कि हिन्दू धर्म में हनुमान जी को साहस, भक्ति  और वीरता की प्रतिमूर्ति माना जाता है। पवनपुत्र हनुमान जी को कई नामों से जाना जैसे- बजरंगबली, पवनपुत्र, मारुतीनन्दन, केसरी नंदन , महावीर आदि। मान्यता है कि हनुमान चालीसा पढ़ने से दुःख, भय तथा शारीरिक कष्ट दूर होती है।


Hanuman Chalisa in Hindi- हनुमान चालीसा हिंदी में
Hanuman Chalisa in Hindi- हनुमान चालीसा हिंदी में

हनुमान चालीस

सरल हिन्दी अनुवाद, प्रभावशाली तांत्रिक हनुमान यंत्र, बजरंग बाण, संकटमोचन हनुमानाष्टक, हनुमत् स्तवन, श्री राम स्तुति व आरती सहित

तान्त्रिक पूजन विधि

प्रातः स्नान करके लाल वस्त्र पहनकर हनुमान जी की मूर्ति, प्रभावशाली तांत्रिक हनुमान यंत्र को (भोजपत्र या ताम्र पर खुदवाकर) सामने रखें और सिन्दूर या सिमरक, चावल, लाल पुष्प, धूप, अगरबत्ती और दीप प्रज्वलित करके पूजन करें। यथा शक्ति मोतीचूर (बून्दी) बेसन के लड्डू का भोग लगावें। फिर पुष्प हाथ में लेकर नीचे लिखे श्लोक को पढ़े।


Hanuman Chalisa in Hindi- हनुमान चालीसा हिंदी में
Hanuman Chalisa in Hindi- हनुमान चालीसा हिंदी में


अतुलित बलधामं हेम शैलाभदेहं, दनुज-वन कृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्।

सकल गुणनिधानं वानराणामधीशं, रघुपति प्रियभक्तं वातजातं नमामि।।

तत्पश्चात् पुष्प समर्पण करके मन में हनुमान जी का ध्यान करते हुए हनुमान चालीसा का पाठ करें। अन्त में लाल चन्दन की माला से ‘‘हं हनुमते रूद्रात्मकाय हुं फट्’’ इस मत्र का 108 बार नित्य जाप करें।

श्री हनुमान चालीसा

।।दोहा।।

श्री गुरू चरन सरोज रज, निज मन मुकुरु सुधारि।

बरनऊँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।।

श्री गुरुजी महाराज के चरण कमलों की धूलि से अपने मन रूपी दर्पण को पवित्र करके श्री रघुवीर के निर्मल यश का वर्णन करता हूँ, जो चारों फल (धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष) देने वाला है।

बुद्धिमान तनु जानिके, सुमिरौं पवन कुमार।

बल, बुद्धि, विद्या देहु मोहिं, हरहु कलेश विकार।।

हे पवनकुमार! मैं आपका स्मरण करता हूँ। आप तो जानते ही हैं कि मेरा शरीर और बुद्धि निर्बल है। मुझे शारीरिक बल, सद्बुद्धि एवं ज्ञान दीजिए और मेरे दुःखों व दोषों का नाश कर दीजिए।

।।चैपाई।।

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।

जय कपीस तिहुँ लोक उजागर।।

श्री हनुमानजी! आपकी जय हो। आपका ज्ञान और गुण अथाह है। हे कपीश्वर! आपकी जय हो। तीनों लोकों (स्वर्ग-लोक, भू-लोक और पाताल लोक) में आपकी कीर्ति है।

रामदूत अतुलित बलधामा।

अंजनिपुत्र पवनसुत नामा।।

हे पवनसुत अंजनीनन्दन! श्रीरामदूत! आपके समान दूसरा कोई बलवान नहीं है।

महावीर विक्रम बजरंगी।

कुमति निवार सुमति के संगी।।

हे महावीर बजरंगबली! आप विशेष पराक्रम वाले हैं। आप दुर्बुद्धि को दूर करते हैं और अच्छी बुद्धि वालों के सहायक हैं।

कंचन बरन विराज सुवेसा।

कानन कुण्डल कुंचित केसा।।

आप सुनहले रंग, सुन्दर वस्त्रों, कानों में कुण्डल और घुंघराले बालों से सुशोभित हैं।

हाथ बज्र और ध्वजा बिराजै।

काँधे मूँज जनेऊ साजै।।

आपके हाथ में वज्र और ध्वजा है तथा कन्धे पर मूंज का जनेऊ शोभायमान है।

शंकर सुवन केसरी नन्दन।

तेज प्रताप महा जग बन्दन।।

हे शंकर के अवतार! हे केसरी-नन्दन! आपके पराक्रम और महान यश की संसार भर में वन्दना होती है।

विद्यावान गुनी अति चातुर।

राम काज करिबे को आतुर।।

आप प्रकाण्ड विद्यानिधान हैं, गुणवान और अत्यन्त कार्यकुशल होकर श्रीराम- काज करने के लिए उत्सुक रहते हैं।

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।

राम लखन सीता मन बसिया।।

आप श्रीराम के चरित्र सुनने में आनन्द-रस लेते हैं। श्री राम, सीता और लक्ष्मण आपके हृदय में बसते हैं।

Hanuman Chalisa in Hindi- हनुमान चालीसा हिंदी में
Hanuman Chalisa in Hindi- हनुमान चालीसा हिंदी में

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा।

विकट रूप धरि लंक जरावा।

आपने अपना बहुत छोटा रूप धारण करके सीता माँ को दिखाया तथा भयंकर रूप धारण करके लंका को जलाया।

भीम रूप धरि असुर संहारे।

रामचन्द्र के काज संवारे।।

आपने विकराल रूप धारण करके राक्षसों को मारा और श्रीरामचन्द्र के उद्ेश्यों को सफल बनाने में सहयोग दिया।

लाय संजीवन लखन जियाये।

श्री रघुवीर हरिष उर लाये।।

आपने संजीवनी बूटी लाकर लक्ष्मणजी को जिलाया जिससे श्री रघुवीर ने हर्षित होकर आपको अपने हृदय से लगा लिया।

रघुपति कीन्हीं बहुत बड़ाई।

तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।।

हे पवनसुत! श्रीरामचन्द्र जी ने आपकी बहुत प्रंशसा की और कहा कि तुम मेरे भरत जैसे प्यारे भाई हो।

सहस बदन तुम्हरो यश गावैं।

अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं।।

श्रीराम ने आपको यह कहकर हृदय से लगा किया कि तुम्हारा यश हजार मुख से सराहनीय हैं।

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा।

नारद सारद सहित अहीसा।।

जम कुबेर दिगपाल जहां ते।

कवि कोविद कहि सके कहाँ ते।।

श्रीसनक, श्रीसनातन, श्रीसनन्दन, श्रीसनत्कुमार आदि मुनि, ब्रम्हा आदि देवता, नारदजी, सरस्वती जी, शेषनाग जी, यमराज, कुबेर आदि सब दिशाओं को रक्षक, कवि, विद्वान, पंडित या कोई भी आपके यश को पूरी तरह वर्णन नहीं कर सकते।

तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा।

राम मिलाय राजपद दीन्हा।।

आपने सुग्रीव जी को श्रीराम से मिलाकर उपकार किया जिसके कारण वे राजा बने।

तुम्हरो मंत्र विभीषन माना।

लंकेश्वर भये सब जग जाना।।

आपके उपदेश का विभीषण ने पूर्णतः पालन किया, इसी कारण वे लंका के राजा बने, इसको सब संसार जानता है।

जुग सहस्र जोजन पर भानू।

लील्यो ताहि मधुर फल जानू।।

जो सूर्य इतने योजन दूरी पर है कि उस पर पहुँचने के लिए हजारों युग लगें। उस हजारों योजन की दूरी पर स्थित सूर्य को आपने एक मीठा फल समझकर निगल लिया।

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं।

जलधि लांघि गए अचरज नाहीं।।

आपने श्रीरामचन्द्र जी की अंगूठी मुँह में रखकर समुद्र को पार किया परन्तु आपके लिए इसमें कोई आश्चर्य नहीं है।

Hanuman Chalisa in Hindi- हनुमान चालीसा हिंदी में
Hanuman Chalisa in Hindi- हनुमान चालीसा हिंदी में

दुर्गम काज जगत के जेते।

सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।।

संसार में जितने भी कठिन से कठिन काम हैं, वे सभी आपकी कृपा से सहज और सुलभ हो जाते हैं।

राम दुआरे तुम रखवारे।

होत न आज्ञा बिनु पैसारे।।

श्रीरामचन्द्र जी के द्वार के आप रखवाले हैं, जिसमें आपकी आज्ञा के बिना किसी को प्रवेश नहीं मिल सकता। (अर्थात् श्रीराम कृपा पाने के लिए आपको प्रसन्न करना आवश्यक है)।

सब सुख लहै तुम्हारी सरना।

तुम रक्षक काहू को डरना।।

जो भी आपकी शरण में आते हैं उन सभी को आनन्द एवं सुख प्राप्त होता है और जब आप रक्षक हैं, तो फिर किसी का डर नहीं रहता।

आपन तेज सम्हारो आपे।

तीनों लोक हांक ते कांपे।।

आपके सिवाय आपके वेग को कोई नहीं रोक सकता। आपकी गर्जना से तीनों लोक कांप जाते हैं।

भूत पिशाच निकट नहिं आवै।

महावीर जब नाम सुनावै।।

हे पवनपुत्र आपका ‘‘महावीर’’ हनुमान जी नाम  सुनकर भूत-पिशाच आदि दुष्ट आत्माएँ पास भी नहीं आ सकती।

नासै रोग हरै सब पीरा।

जपत निरंतर हनुमत बीरा।।

बीर हनुमान जी! आपका निरन्तर जप करने से सब रोग नष्ट हो जाते हैं और सब कष्ट दूर हो जाते हैं।

संकट ते हनुमान छुड़ावै।

मन क्रम वचन ध्यान जो लावै।।

हे हनुमान जी! विचार करने में, कर्म करने में और बोलने मंे, जिनका ध्यान आप में लगा रहता है, उनको सब दुखों से आप दूर कर देते हैं।

सब पर राम तपस्वी राजा।

तिनके काज सकल तुम साजा।

तपस्वी राजा श्रीरामचन्द्र जी सबसे श्रेष्ठ हैं, उनके सब कार्यों को आपने सहज में कर दिया।

और मनोरथ जो कोई लावै।

सोई अमित जीवन फल पावै।।

जिस पर आपकी कृपा हो, ऐसा जीव कोई भी अभिलाषा करे तो उसे तुरन्त फल मिलता हैं, जीव जिस फल के विषय में सोच भी नहीं सकता वह मिल जाता है अर्थात् सारी कामनाएं  पूरी हो जाती हैं।

चारों जुग परताप तुम्हारा।

है परसिद्ध जगत उजियारा।।

आपका यश चारों युगों (सतयुग, त्रेता, द्वापर तथा कलियुग) में फैला हुआ हैं, सम्पूर्ण संसार में आपकी कीर्ति सर्वत्र प्रकाशमान है।

साधु संत के तुम रखवारे।

असुर निकंदन राम दुलारे।।

हे श्रीराम के दुलारे हनुमान! आप साधु और संतों तथा सज्जनों की रक्षा करते हैं तथा दुष्टोें का सर्वनाश करते हैं।

Hanuman Chalisa in Hindi- हनुमान चालीसा हिंदी में
Hanuman Chalisa in Hindi- हनुमान चालीसा हिंदी में

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता।

अस वर दीन जानकी माता।।

हे हनुमंत लाल जी आपको माता श्री जानकी से ऐसा वरदान मिला हुआ है, जिससे आप किसी को भी ‘आठों सिद्धियाँ’ और ‘नौ निधियाँ’’ (सब प्रकार की सम्पत्ति) दे सकते हैं।

(1) अणिमा- जिससे साधक किसी को दिखाई नहीं पड़ता और कठिन से कठिन पदार्थ में प्रवेश कर जाता है।

(2) महिमा- जिसमें योगी अपने को बहुत बड़ा बना लेता है।

(3) गरिमा- जिससे साधक अपने को चाहे जितना भारी बना लेता है।

(4) लघिमा- जिससे जितना चाहे उतना हल्का बन जाता हैै।

(5) प्राप्ति- जिससे इच्छित पदार्थ की प्राप्ति होती है।

(6) प्राकाम्य- जिससे इच्छा करने पर वह पृथ्वी में समा सकता हैं, आकाश में उड़ सकता है।

(7) ईशित्व- जिससे सब पर शासन का सामथ्र्य हो जाता है।

(8) वशित्व- जिसमेें दूसरों को वश में किया जाता है।

‘‘पद्य, महापद्य, शंख, मकर, कच्छप, मुकुन्द, कुन्द, नील, बच्र्च।’’

राम रसायन तुम्हरें पासा।

सदा रहो रघुपति के दासा।।

आप निरन्तर श्री रघुनाथ जी की शरण में रहते हैं, जिससे आपके पास वृद्धावस्था और असाध्य रोगों के नाश के लिए ‘राम-नाम’ रूपी औषधि है।

तुम्हरे भजन राम को पावै।

जनम जनम के दुख बिसरावै।।

अन्त काल रघुबर पुर जाई।

जहाँ जन्म हरि भक्त कहाई।।

आपका भजन करने से श्रीराम जी प्राप्त होते हैं और जन्म-जन्मांतर के दुःख दूर होकर अन्त समय श्री रघुनाथ जी के धाम को जाते हैं और यदि फिर भी मृत्युलोक में जन्म लेंगे तो भक्ति करेंगे और श्रीराम भक्त कहलायेंगे।

और देवता चित्त न धरई।

हनुमत सेइ सर्व सुख करई।।

हे हनुमान जी! आपकी सेवा करने से सब प्रकार से सुख मिलते हैं, फिर किसी देवता की पूजा करने की आवश्यकता नहीं रहती।

संकट कटै मिटै सब पीरा।

जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।।

हे वीर हनुमान जी! जो आपका स्मरण करता है, उसके सब संकट कट जाते हैं और सब पीड़ा मिट जाती हैं।

जय जय जय हनुमान गोसाईं।

कृपा करहु गुरूदेव की नाईं।।

हे स्वामी हनुमान जी! आपकी जय हो, जय हो, जय हो। आप मुझ पर कृपालु श्री गुरूजी के समान कृपा कीजिए।

जो सत बार पाठ कर कोई।

छूटहि बंदि महासुख होई।।

जो कोई इस हनुमान चालीसा को सौ बार पाठ करेगा वह सब बन्धनों से छूट जायेगा और उसे परमानन्द मिलेगा।

जो यह पढ़ै हनुमान चालीस।

होय सिद्धि साखी गौरीसा।।

भगवान शंकर ने यह हनुमान चालीसा लिखवाया इसलिए वे साक्षी हैं कि जो इसे पढ़ेगा उसे निश्चय ही सफलता प्राप्त होगी।

तुलसीदास सदा हरि चेरा।

कीजै नाथ हृदय महँ डेरा।।

हे नाथ हनुमान जी! ‘‘तुलसीदास’’ सदा ही ‘‘श्रीराम’’ का दास है। इसलिए आप उसके हृदय में निवास कीजिए।

संकटमोचन हनुमानाष्टक


Hanuman Chalisa in Hindi- हनुमान चालीसा हिंदी में
Hanuman Chalisa in Hindi- हनुमान चालीसा हिंदी में

बाल समय रवि भक्षि लियो तब, तीनहुं लोक भयो अंधियारो।

ताहि सों त्रास भयो जग को, यह संकट काहु सो जात न टारो।

देवन आनि करी विनती तब, छांड़ि दियो रवि कष्ट निवारो।

को नाहिं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो।। 1।।

हे हनुमानजी! आप बालक थे तब आपने सूर्य को अपने मुँह में रख लिया जिससे तीनों लोकांे में अंधेरा हो गया। इससे संसार भर में विपत्ति छा गयी और इस संकट को कोई भी दूर नहीं कर सका। देवताओं ने आकर आपसे विनती की तब आपने सूर्य को मुक्त कर दिया। इस प्रकार संकट दूर हुआ। हे हनुमान जी! संसार में ऐसा कौन है जो आपका ‘संकटमोचन’ नाम नहीं जानता।

बालि की त्रास कपीस बसै गिरि, जात महाप्रभु पंथ निहारो।

चैंकि महा मुनि साप दियो तब, चाहिए कौन बिचार बिचारो।

कै द्विज रूप लिवाय महाप्रभु, सो तुम दास के सोक निवारो ।।को02।।

बालि के डर से सुग्रीव पर्वत पर रहते थे। उन्होंने आपको पता लगाने के लिए भेजा। आपने अपना ब्राम्हाण का रूप धारण करके श्रीरामचन्द्र से भेंट की और उनको अपने साथ लिवा लाये जिससे आपने सुग्रीव के शोक का निवारण किया। हे हनुमान जी! संसार में ऐसा कौन है जो आपका ‘संकटमोचन’ नाम नहीं जानता।

अंगद के संग लेन गये सिए, खोज कपीस यह बैन उचारो।

जीवत ना बचिहौ हम सों जु, बिना सुधि लाए इहाँ पगु धारो।

हेरि थके तट सिंधु सबै तब, लाय सिया सुधि प्रान उबारो।। को03।।

सुग्रीव ने अंगद के साथ सीता जी की खोज के लिए अपनी सेना को भेजते समय कह दिया था कि यदि सीता जी का पता लगाकर नहीं लाये तो हम तुम सबको मार डालेंगे। सब ढूंढ-ढूंढकर हार गये। तब आप समुद्र के तट से कूदकर सीताजी का पता लगाकर लाये जिससे सबके प्राण बचे। हे हनुमान! संसार में ऐसा कौन है जो आपका ‘संकटमोचन’ नाम नहीं जानता।

रावन त्रास दई सिय को तब, राक्षसि सों कहि सोक निवारो।

ताहि समय हनुमान महाप्रभु, जाय महा रजनीचर मारो।

चाहत सीय अशोक सो आगि सु, दै प्रभू मुद्रिका सोक निवारो।। को04।।

जब रावण ने सीता जी को भय दिखाया और कष्ट दिया और सब राक्षसियों से कहा कि सीता जी को मनावें, हे महावीर हनुमानजी! उस समय आपने पहुँचकर महान राक्षसों को मारा। सीताजी ने अशोक वृक्ष से अग्नि मांगी (स्वयं को भस्म करने के लिए) परन्तु आपने उस वृक्ष पर से श्रीरामचन्द्र की अंगूठी डाल दी जिससे सीता जी की चिन्ता दूर हुई। हे हनुमान जी! संसार में ऐसा कौन है जो आपका ‘संकटमोचन’ नाम नहीं जानता।

बान लग्यो उर लछिमन के तब, प्रान तज्यो सुत रावन मारो।

लै गृह वैद्य सुषेन, तबै गिरि द्रोन सु बीर उपारो।

आनि सजीवन हाथ दई तब, लछिमन के तुम प्रान उबारो।। को05।।

रावन के पुत्र मेघनाथ ने बाण मारा जो लक्ष्मण जी की छाती पर लगा और उससे उनके प्राण संकट में पड़ गये। तब आप ही सुषेण वैद्य को घर सहित उठा लाए और द्रोणाचल पर्वत सहित संजीवनी बूटी ले आये जिससे लक्ष्मण जी के प्राण बच गये। हे हनुमान जी! संसार में ऐसा कौन है जो आपका ‘संकटमोचन’ नाम नहीं जानता।

रावन जुद्ध जु आन कियो तब नाग की फंास सबै सिर डारो।

श्री रघुनाथ समेत सबै दल, मोह भयो यह संकट भारो।

आनि खगेस तबै हनुमान जु, बन्धन काटि सुत्रास निवारो।। को06।।

रावण ने घोर युद्ध करते हुए सबको नागपाश में बांध लिया तब श्री रघुनाथ सहित सारे दल में यह मोह छा गया कि यह तो बहुत भारी संकट है। उस समय, हे हनुमान जी! आपने गरूड़ जी को लाकर बंधन को कटवा दिया जिससे संकट दूर हुआ। हे हनुमान जी! संसार में ऐसा कौन है जो आपका ‘संकटमोचन’ नाम नहीं जानता।

Hanuman Chalisa in Hindi- हनुमान चालीसा हिंदी में
Hanuman Chalisa in Hindi- हनुमान चालीसा हिंदी में

बंधु समेत जबै अहिरावन, लै रघुनाथ पाताल सिधारो।

देविहिं पूजि भली विधि सों बलि, देउ सबै मिलि मंत्र विचारो।

जाय सहाय भयो तब ही, अहिरावन सैन्य समेत संहारो।।को07।।

जब अहिरावण श्री रघुनाथ जी को लक्ष्मण सहित पाताल को ले गया और भलीभांति देवी जी की पूजा करके सबके परामर्श से यह निश्चय किया कि इन दोनों भाइयों की बलि दूंगा, उसी समय आपने वहाँ पहुँच कर अहिरावण को उसकी सेना समेत मार डाला। हे हनुमानजी! संसार में ऐसा कौन है जो आपका ‘संकटमोचन’ नाम नहीं जानता।

काज किए बड़ देवन के तुम, वीर महाप्रभु देखि विचारो।

कौन सो संकट मोर गरीब को, जो तुमसों नहिं जात है टारो।

बेगि हरौ हनुमान महाप्रभु, जो कुछ संकट होय हमारो ।।को08।।

हे महावीर! आपने बड़े-बड़े देवों के कार्य संवारे हैं। अब आप देखिये और सोचिए कि मुझ दीनहीन का ऐसा कौन सा संकट है जिसको आप दूर नहीं कर सकते। हे महावीर हनुमान जी! हमारा जो कुछ भी संकट हो आप उसे शीघ्र दूर कर दीजिए। हे हनुमान जी! संसार में ऐसा कौन है जो आपका ‘सकंटमोचन’ नाम नहीं जानता।

श्री बजरंग बाण

दोहा-

निश्चय प्रेम प्रतीत ते, विनय करैं सनमान।

तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करें हनुमान।।

जय हनुमन्त सन्त हितकारी, सुन लीजै प्रभु अरज हमारी।।

जन के काज विलम्ब न कीजै। आतुर दौरि महा सुख दीजै।।

जैसे कूदि सिन्धू महिपारा। सुरसा बदन पैठि विस्तारा।।

आगे जाय लंकिनी रोका। मारेहु लात गई सुरलोका।।

जाय विभीषन को सुख दीन्हा। सीता निरखि परमपद लीन्हा।।

बाग उजारि सिन्धु महँ बोरा। अति आतुर जमकातर तोरा।।

अक्षय कुमार मारि संहारा। लूम लपेट लंक को जारा।।

लाह समान लंक जरि गई। जय जय धुनि सुरपुर में भई।।

अब बिलम्ब केहि कारन स्वामी। कृपा करहु उर अन्तर्यामी।।

जय जय लखन प्राण के दाता। आतुर होय दुःख करहु निपाता।।

जै गिरिधर जै जै सुख सागर। सुर समूह समरथ भटनागर।

ऊँ हनु हनु हनु हनुमन्त हठीले। बैरिहि मारू बज्र की कीले।।

गदा बज्र लै बैरिहिं मारो। महाराज प्रभु दास उबारो।।

ऊँकार हुँकार महाप्रभु धावो। बज्र गदा हनु विलम्ब न लावो।।

ऊँ ह्रीं ह्रीं ह्रीं हनुमन्त कपीशा। ऊँ हुँ हुँ हुँ हनु अरि उर शीशा।।

सत्य होहु हरि शपथ पायके। राम दूत धरु मारु जायके।।

जय जय जय हनुमन्त अगाधा। दुःख पावत जन केहि अपराधा।।

पूजा जप तप नेम अचारा। नहिं जानत हौं दास तुम्हारा।।

वन उपवन मग गिरि गृह माहीं। तुम्हरे बल हम डरपत नाहीं।।

पाँय परौं कर जोरिमनावौं। यहि अवसर अब केहि गोहरावौं।।

जय अश्विन कुमार बलवन्ता। शंकर सुवन वीर हनुमन्ता।।

बदन कराल काल कुल घालक। राम सहाय सदा प्रतिपालक।।

भूत पे्रत पिशाच निशाचर। अग्नि बैताल काल मारी मर।।

इन्हें मारु तोहि शपथ राम की। राखउ नाथ मरजाद नाम की।।

जनक सुता हरि दास कहावो। ताकी शपथ विलम्ब न लावो।।

जै जै जै धुनि होत अकाशा। सुमिरत होत दुसह दुःख नाशा।।

चरण चरण कर जोरि मनावौं। यहि अवसर अब केहि गोहरावौं।।

उठु उठु चलु तोहि राम दोहाई। पांय परौं कर जोरि मनाई।।

ऊँ चं चं चं चं चपल चलंता। ऊँ हनु हनु हनु हनु हनुमंता।।

ऊ हँ हँ हाँक देत कपि चंचल। ऊँ सं सं सहमि पराने खल दल।।

अपने जन को तुरत उबारा। सुमिरत होय आनन्द हमारो।।

यह बजरंग बाण जेहि मारै। ताहि कहो फिर कौन उबारै।।

पाठ करै बजरंग बाण की। हनुमत रक्षा करैं प्राण की।।

यह बजरंग बाण जो जापै। ताते भूत प्रेत सब कांपै।।

धूप देय अरु जपै हमेशा। ताके तन नहिं रहै कलेशा।।

श्री हनुमत् स्तवन

सो0 - प्रनवउं पवनकुमार खल बन पावक ग्यानधन।

जासु हृदय आगार बसहिं राम सर चाप धर।।

अतुलित बलधामं हेमशैलाभदेहं,

दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगणयम्।

सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं,

रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि।।

गोष्पदीकृतवारीशं मशकीकृतराक्षसम्,

रामायण महामालारत्नं वन्देऽनिलात्मजम्।।

अज्जनानन्दनं वीरं जानकीशोकनाशम्।

कपीशमक्षहन्तारं वन्दे लंकाभयंकरम्।।

उल्लंघ्य सिन्धौः सलिलं सलीलं यः शोकवहिृं जनकात्मजायाः।

आदाय तेनैव ददाह लंका नमामि तं प्राज्जलिराज्जनेयम्।।

मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्।

वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये।।

आज्जनेयमतिपाटलाननं काज्चनाद्रिकमनीयविग्रहम्।

पारिजाततरुमूलवासिनं भावयामि पवमाननन्दनम्।।

यत्र तत्र रघुनाथकीर्तनं तत्र तत्र कृतमस्तकाज्जलिम्।

वाष्पवारिपरिपूर्णलोचनं मारुतिं नमत राक्षसान्तकम्।।

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श्री हनुमान जी की आरती।

आरती कीजै हनुमान लला की, दुष्टदलन रघुनाथ कला की।

जाके बल से गिरिवर काँपे, रोग-दोष जाके निकट न झाँकै।।

अंजनि पुत्र महा बलदाई, संतन के प्रभु सदा सहाई।

दे बीरा रघुनाथ पठाये, लंका जारि सिया सुधि लाये।

लंका सो कोट समु्रद सी खाई, जात पवनसुत बार न लाई।

लंका जारि असुर संहारे, सियाराम जी के काज संवारे।

लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे, आनि सजीवन प्रान उबारे।

पैठि पताल तोरि जमकारे, अहिरावन के भुजा उखारे।

बायें भुजा असुर दल मारे, दहिने भुजा संतजन तारे।

सुर नर मुनि जन आरती उतारें, जै जै जै हनुमान उचारें।

कंचन थार कपूर लौ छाई, आरति करत अंजना माई।

जो हनुमान जी की आरति गावैं, बसि बैकुंठ परमपद पावै।

लंक विध्वंस कीन्ह रघुराई, तुलसीदास प्रभु कीरति गाई।

Hanuman Chalisa in Hindi- हनुमान चालीसा हिंदी में
Hanuman Chalisa in Hindi- हनुमान चालीसा हिंदी में

श्रीराम-स्तुति।

श्रीरामचन्द्र कृपालु भजु मन हरण भवभय दारूणं।

नवकंज-लोचन, कंजमुख, कर-कंज पद कंजारूणं।।

कंदर्प अगणित कमित छवि, नवनील-नीरद-संुदरं।

पट पीत मानहु तड़ित रूचि शुचि नौमि जनक सुतावरं।।

भजु दीबंधु दिनेश दानव-दैत्य-वंश-निकंदन।

रघुनंद आनंदकंद कोशलचंद दशरथ-नंदनं।।

सिर मुकुट कुंडल तिलक चारु उदारु अंग विभूषणं।

आजानुभुज शर-चाप-घर, संग्राम-चित-खर दूषणं।

इति वदति तुलसीदास शंकर-शेष-मुनि-मन-गंजनं।

रंजनं मम हृदय कंज निवासकुरु, कामादि-खल-दल-गंजनं।

मनु जाहिं राचेउ मिलहि सो बरु सहज सुंदर सुँदर साँवरो।

करुना निधान सुजान सीलु सनेहु जानत रावरो।

एहि भाँति गैरी असीस सुनि सिय सहित हियं। हरषीं अली।

तुलसी भवानिहि पूजि पुनि पुनि मुदित मन मंदिर चली।।


सो0- जानि गौरि अनुकूल सिय हिय हरषु न जाइ कहि।

मंजलु मंगल मूल बाम अंग फरकन लगे।।

बोलो सियावर रामचन्द्र की जय।।


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