शनिवार, 30 जनवरी 2021

Durga Chalisa in Hindi|दुर्गा चालीसा हिंदी में अर्थ सहित

दुर्गा चालीसा हिंदी में-Durga Chalisa in Hindi

                  हिन्दुओं की देवी दुर्गा माता है। जिनको आदि शक्ति जग्दम्बा भी कहते हैं । वह अंधकार व अज्ञानता रुपी राक्षसों से रक्षा करने वाली तथा कल्याणकारी हैं। इनके बारे में कहा जात है कि वे शान्ति, समृद्धि तथा धर्म पर आघात करने वाली राक्षसी शक्तियों का नाश करतीं हैं।
                  दुर्गा जी शेर पर सवार एक देवी के रूप में की जाती है। दुर्गा देवी 8 भुजाओं से युक्त हैं प्रत्येक भुजा में कोई न कोई शस्त्रास्त्र होता है। महिषासुर नामक असुर का वध किया तथा माता का दुर्गा देवी नाम दुर्गम नाम के महान दैत्य का वध करने के कारण पड़ा। जिसके कारण वे समस्त ब्रह्मांड में दुर्गा देवी के नाम से भी विख्यात हो गई। 
                  अतः नवरात्रि के दौरान नव दुर्गा के 9 रूपों का ध्यान, उपासना व आराधना की जाती है तथा नवरात्रि के प्रत्येक दिन मां दुर्गा के एक-एक शक्ति रूप का पूजन किया जाता है।

Durga Chalisa in Hindi-

तांन्त्रिक पूजन विधि

प्रातः स्नान करके दुर्गा माता की मूर्ति तथा इस पोस्ट में अंकित यंत्र को ताम्रपत्र पर खुदवाकर सामने रखें। रौली, कुंकुम, अक्षत्, लाल पुष्प (गुलाब विशेष प्रिय), धूप, दीप आदि से  पूजन करें तथा यथा शक्ति हलुआ, चना या कच्चे दूध और खोये की मिठाई का भोग लगावें। पुष्प हाथ मेें लेकर लिखा श्लोक पढ़ें-

Durga Chalisa in Hindi|दुर्गा चालीसा हिंदी में अर्थ सहित
Durga Chalisa in Hindi|दुर्गा चालीसा हिंदी में अर्थ सहित

ऊँ सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।

शरण्ये त्रयम्बके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते।।

तत्पश्चात् पुष्प अर्पण कर चालीसा का पाठ करें। पाठ के अन्त में ‘‘ऊँ हृीं दुं दुर्गायै नमः’’ इस मंत्र का 108 बार तुलसी या सफेद चन्दन की माला से जाप करें।

Durga Chalisa in Hindi|दुर्गा चालीसा हिंदी में अर्थ सहित
Durga Chalisa in Hindi|दुर्गा चालीसा हिंदी में अर्थ सहित

श्री दुर्गा चालीसा

नमो नमो दुर्गे सुख करनी।

नमो नमो अम्बे दुःख हरनी।।

सुख प्रदान करने वाली श्री दुर्गाजी को नमस्कार है। दुःख को हरने वाली अम्बा जी को नमस्कार है।

निरंकार है ज्योति तुम्हारी।

तिहूँ लोक फैली उजियारी।।

आपकी ज्योति का प्रकाश निराकर अर्थात् असीम है जिससे तीनों लोकों (पृथ्वी, आकाश, पाताल) में उजियाला फैल रहा है।

शशि ललाट मुख महा विशाला।

नेत्र लाल भृकुटि विकराला।।

आपका मस्तक चन्द्रमा के समान और मुँह की शोभा अति विशाल है। नयन लाल आभा से युक्त और भवें (भृकृटियाँ) विकराल रूप वाली हैं।

रूप मातु को अधिक सुहावे।

दरश करत जन अति सुख पावे।।

माता का यह रूप बहुत सुन्दर प्रतीत होता है। जिसके दर्शन करने से भक्तजनों को सुख मिलता है।

तुम संसार शक्ति लय कीना।

पालन हेतु अन्न धन दीना।।

तुम ही संसार की समस्त शक्ति हो अथवा आपने संसार की सभी शक्तियों को अपने में समेटा हुआ है और जग की पालना करने हेतु अन्न और धन प्रदान किया है।

अन्नपूर्णा हुई जग पाला।

तुम ही आदि सुन्दरी बाला।।

अन्नपूर्णा का रूप धरकर आप जग का पालन कर रही हैं और आदि (प्राचीन) बालासुन्दरी का रूप भी आप ही हैं।

प्रलयकाल सब नाशन हारी।

तुम गौरी शिव शंकर प्यारी।।

प्रयलकाल में आप ही सब का नाश करने वाली हैं। शिव शंकर की प्रिया गौरी-पार्वती भी आप ही हैं।

शिव योगी तुम्हारे गुण गावें।

ब्रम्हा, विष्णु तुम्हें नित ध्यावें।।

शिव तथा योगीगण भी आपका गुणगान करते हैं और ब्रम्हा-विष्णु देवता भी नित्य ही आपका ध्यान करते हैं।

रूप सरस्वती को तुम धारा।

दे सुदुद्धि ऋषि मुनिन उबारा।।

आपने ही श्री सरस्वती जी का रूप धारण करके ऋषि मुनियों को सुबुद्धि प्रदान करके उनका उद्वार किया है।

धरा रूप नरसिंह को अम्बा।

परगट भई फाड़कर खम्बा।।

हे अम्बा माता! आपने ही श्री नृसिंह अवतार का रूप धारण करके खम्बे में से प्रकट होकर प्रहलाद की रक्षा की थी।

रक्षा करि  प्रहलाद बचायो।

हिरणाकुक्ष को स्वर्ग पठायो।।

इस प्रकार अवतार लेकर आपने प्रहलाद की रक्षा करी तथा हिरण्यकश्यप को भी स्वर्ग मिला क्योंकि वह आपके हाथों से मारा गया।

लक्ष्मी रूप धरो जग माहीं।

श्री नारायण अंग समाहीं।।

लक्ष्मी जी का रूप धारण करके आप ही श्री नारायण के संग में विराजमान हैं।

क्षीरसिन्धु में करत विलासा।

दया सिन्धु दीजै मन आसा।।

भगवान विष्णु के साथ क्षीरसागर में विराजमान, हे दयासिंधु देवी! आप मेरे मन की आशाओं को पूर्ण करो।

हिंगलाज में तुम्हीं भवानी। 

महिमा अमित न जात बखानी।।

हिंगलाज की प्रसिद्ध देवी भवानी भी आप ही हैं और आपकी अमिट महिमा का बखान नहीं किया जा सकता।

मातंगी अरु धूमावति माता।

भुवनेश्वरी बगला सुख दाता।।

मातंगी और धूमावती आप स्वयं ही हैं भुवनेश्वरी देवी और बगला मुखी के रूप में भी आप ही सुख की दाता हैं।

श्री भैरव तारा जग तारिणी।

छिन्न भाल भव दुःख निवारिणी।।

श्री भैरवी और तारादेवी के रूप में आप ही जगतारक हैं। छिन्नमस्ता देवी के अवतार में भी आप ही भवसागर के दुःखों का निवारण करती हैं।

केहरि वाहन सोह भवानी।

लंागुर वीर चलत अगवानी।।

वाहन (सवारी) के रूप में केहरी (सिंह) पर आप शोभायमान भवानी जी! लांगुर जैसे वीर आपकी अगवानी करते हैं।

कर में खप्पर खड्ग विराजै।

जाको देख काल डर भाजै।।

आपके हाथों में जब खप्पर और खड्ग (काली के रूप मंे) होता है तो उसे देखकर काल भी डर कर भाग जाता है।

सोहै अस्त्र और त्रिशूला हैै।

जाते उठत शत्रु हिय शूला।।

विभिन्न अस्त्र-शस्त्र और त्रिशूल उठाये हुए आपके रूप को देखकर शत्रु के हृदय में स्वयं ही  पीड़ा उठने लगती है।

नगरकोट में तुम्हीं बिराजत।

तिहूँ लोक में डंका बाजत ।।

नगर कोट काँगड़े वाली देवी के रूप में भी आप ही विराजमान हैं। इस प्रकार से तीनों लोकों में आपके नाम का डंका बज रहा है।

शुम्भ निशुम्भ दानव तुम मारे।

रक्त बीज शंखन संहारे।।

शुम्भ और निशुम्भ जैसे दानवांे का वध आपने किया और रक्तबीज का भी हजारों की संख्या में विनाश किया।

महिषासुर नृप अति अभिमानी।

जेहि अघ भार, मही अकुलानी।।

अत्यन्त अभिमानी असुर महिषासुर के पापों के भार से जब धरती व्याकुल हो उठी।

इन्हें भी पढ़े- हनुमान चालीसा हिंदी में- Hanuman Chalisa in Hindi

रूप कराल कालिका धारा।

सेन सहित तुम तिहि संहारा।।

तब काली का विकराल रूप धारण करके आपने सेना सहित उसका संहार कर दिया।

परी गाढ़ सन्तन पर जब जब।

भई सहाय मातु तुम तब तब।।

इस प्रकार जब-जब संतजनों पर आपत्तियाँ आई, हे माता तब-तब आपने उनकी सहायता की।

अमर पुरी अरु बासव लोका।

तब महिमा सब रहें अशोका।।

जब हक ये पुरियाँ और सब लोक रहेंगे तब तक आपकी महिमा से सब शोक रहित होंगे।

ज्वाला में है ज्योति तुम्हारी।

तुम्हें सदा पूजें नर-नारी।।

श्री ज्वाला जी मेें आप ही की ज्योति जल रही है। नर-नारी सदा आपकी पूजा करते हैं।

प्रेम भक्ति से जो यश गावे।

दुःख दारिद्र निकट नहिं आवे।।

Durga Chalisa in Hindi|दुर्गा चालीसा हिंदी में अर्थ सहित
Durga Chalisa in Hindi|दुर्गा चालीसा हिंदी में अर्थ सहित

प्रेम व भक्तिपूर्वक जो भी व्यक्ति आपके यश का गायन करता है, दुःख और दरिद्र उसके निकट नहीं आते हैं।

ध्यावे तुम्हें जा नर मन लाई।

जन्म-मरण ताको छुटि जाई।।

जो व्यक्ति निष्ठापूर्वक आपका ध्यान करता है उसका जन्म मरण का बंधन निश्चित ही छूट जाता है।

जोगी सुर-मुनि कहत पुकारी।

योग न हो बिन शक्ति तुम्हारी।।

योग भी आपकी शक्ति (कृपा) के बिना संभव नहीं है ये बात भी समस्त योगी साधु और मुनिजन पुकार-पुकार कर कहते है।

शंकर आचारज तप कीनों।

काम अरू क्रोध जीति सब लीनों।।

शंकराचार्य ने आचारज नामक तप करके, काम, क्रोध, मद, लोभ आदि सब को जीत लिया।

निशि दिन ध्यान धरो शंकर को।

काहु काल नहिं सुमिरो तुमको।।

उन्होंने प्रतिदिन शंकर भगवान् का ध्यान किया लेकिन आपका स्मरण उन्होंने किसी भी पल नहीं किया।

शक्ति रूप को मरम न पायो।

शक्ति गई तब मन पछितायो।।

आपकी शक्ति का उन्होंने मर्म (भेद) नहीं जाना तो उनकी शक्ति छिन गई और तब वह मन-ही-मन पछताने लगे।

शरणागत हुई कीर्ति बखानी।

जय जय जय जगदम्ब भवानी।।

आपकी शरण में आकर उन्होंने आपकी कीर्ति का बखान किया और जय जय जय जगदम्बा भवानी का उच्चारण किया।

भई प्रसन्न आदि जगदम्बा।

दई शक्ति नहिं कीन विलम्बा।।

तब आदि जगदम्बा जी! आपने प्रसन्न होकर उनकी शक्ति उन्हें लौटाने में विलम्ब नहीं किया।

मोको मातु कष्ट अति घेरो।

तुम बिन कौन हरे दुःख मेरो।।

हे माता! मुझको बहुत से कष्टों ने घेरे रखा है। आपके अतिरिक्त इन दुःखों को कौन हर सकेगा? अर्थात आप ही मेरे दुःखों को दूर करें।

आशा तृष्णा निपट सतावें।

मोह मदादिक सब बिनशावें।

आशा और तृष्णा मुझे सदैव सताती हैं और मोह-मद आदि (मोह, अहंकार, काम, क्रोध, ईष्र्या) भी सब मुझे डराते हैं।

शत्रु नाश कीजै महारानी।

सुमिरौं इकचित तुम्हें भवानी।।

हे भवानी! मैं तुम्हारा एकचित होकर तुम्हारा स्मरण करता हूँ। आप मेरे शत्रुओं का नाश कीजिए।

करो कृपा हे मातु दयाला।

ऋद्धि-सिद्धि दे करहू निहाला।

हे दया बरसाने वाली माता! मुझ पर कृपा कीजिए और ऋद्धि-सिद्धि आदि प्रदान कर मुझे निहाल कीजिए।

जब लगि जिऊं दयाफल पाऊँ।

तुम्हरौ यस मैं सदा सुनाऊँ।।

हे माता! मैं जब तक जीवित हूँ आपकी दया का पात्र बना रहूँ और आपकी यश की कथा सबको सुनाऊँ।

दुर्गा चालीसा जो कोई गावैं।

सब सुख भोग परम पद गावैं।।

इस प्रकार जो भी दुर्गा चालीसा गायेगा अर्थात् पाठ करेगा वह सब सुखों को भोगता हुआ परमपद को प्राप्त होगा।

देवीदास शरण निज जानी।

करहु कृपा जगदम्ब भवानी।।

‘देवीदास’ ने स्वयं आपकी शरण में आकर ये जाना है। हे जगदम्बा! हे भवानी कृपा कीजियेगा।

दोहा

शरणागत रक्षा करें, भक्त रहे निःशंक।

मैं आया तेरी शरण में, मातु लीजिये अंक।।

‘देवीदास’ ने स्वयं आपकी शरण में आकर ये जाना है। हे जगदम्बा! हे भवानी! कृपा कीजिएगा।

Durga Chalisa in Hindi|दुर्गा चालीसा हिंदी में अर्थ सहित
Durga Chalisa in Hindi|दुर्गा चालीसा हिंदी में अर्थ सहित

।।आरती श्री दुर्गा जी की।।

जय अम्बे गौरी मैय्या, जय श्यामा गौरी।

तुमको निश्दििन ध्यावत हरि ब्रम्हा शिवरी।। टेक।।

माँग सिंदूर विराजत, टीको मृगपद को।

उज्ज्वल से दोऊ नैना, चन्द्र बदन नीको।। जय0।।

कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै।

रक्त पुष्प गल माला कंठन पर छाजे ।। जय0।।

केहरि बाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी।

सुर-नर मुनि-जन सेवत, तिनके दुःखहारी।। जय0।।

कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती।

कोटिक चन्द्र दिवाकर, राजत सम ज्योति।। जय0।।

शुम्भ निशुम्भ विडारे, महिषासुर घाती।

धूम्र विलोचन नैना, निश्दििन मदमाती ।। जय0।।

चण्ड मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे।

मधु कैटभ दोउ मारे, सुर भय हीन करे ।। जय0।।

ब्रम्हाणी रूद्राणी तुम कमला रानी।

आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी।।जय0।।

चैसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरू।

बाजत ताल मृदंगा अरु बाजत डमरू ।। जय0।।

तुम ही जग की माता, तुम ही हो भर्ता।

भक्तन की दुःख हर्ता, सुख सम्पत्ति करता।। जय0।।

भुजा चार अति शोभित, खड्ग खप्पर धारी।

मनवांछित फल पावत सेवत नर नारी।। जय0।।

कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।

श्री मालकेतु में राजत कोटि रतन ज्योति।। जय0।।

माँ अम्बे जी की आरती जो कोई नर गावै।

कहत शिवानंद स्वामी सुख-सम्पत्ति पावै ।। जय0।।


।।श्री दुर्गा चालीसा समाप्त।।















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